India Can Become An Important Part Of The Supply Chain Even In Times Of Corona Crisis – अमेरिका ने कहा- कोरोना संकट के दौर में भी सप्लाई-चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है भारत




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कोरोना संकट के दौर में भी भारत के पास सप्लाई-चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने का अवसर है लेकिन उसे टैरिफ कम करना होगा और विदेशी कंपनियों के लिए अधिक स्वागत योग्य नीतियों को अपनाना होगा। ताकि विदेशी कंपनी को भारत में अधिक अवसर मिल सके। यह कहना है अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक का।

राज्य विभाग के दक्षिण और मध्य एशिया ब्यूरो के निवर्तमान प्रमुख एलिस वेल्स ने कहा कि दोनो देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2019 में कुल रिकॉर्ड 150 बिलियन डॉलर था। लेकिन अमेरिका को भारत के लिए संरक्षित बाजार के बारे में चिंताएं हैं जो कभी भी विदेशी कंपनियों को उपयुक्त अवसर नहीं देता है।

वेल्स ने आगे कहा कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा से पहले एक सीमित व्यापार सौदे को अंतिम रूप देने के लिए ठोस प्रयास किए थे, लेकिन कई मुद्दों पर आम सहमति नहीं बन पाई। इस यात्रा से पहले ट्रंप ने 2020 के अंत तक व्यापार समझौते के लिए आशा व्यक्त की थी।

पत्रकारों के लिए एक ऑनलाइन ब्रीफिंग के दौरान, वेल्स ने कहा कि वह इस बात की भविष्यवाणी नहीं कर सकती हैं कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और भारत सरकार इस साल तक समझौते को अंतिम रूप दे ही पाएंगे। लेकिन कोई भी व्यापार सौदा हासिल करने के लिए प्रोत्साहन बहुत अधिक जरूरी है।  

वेल्स ने आगे कहा कि हाल के हफ्तों में, भारत ने वाणिज्यिक बिक्री और अनुदान के माध्यम से अमेरिका सहित दर्जनों देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य दवाओं की आपूर्ति की है। भारत ने मालदीव और कुवैत सहित कई देशों में मेडिकल रैपिड रिस्पांस टीम भेजी है और यह भारत द्वारा अन्य देशों के बीच भरोसा जीतने का अहम कदम है।

वेल्स चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की बहुत आलोचना करते आ रही हैं। उन्होंने कहा चीन और पाकिस्तान सीपीईसी परियोजनाओं में पारदर्शिता नहीं बरत रहा है, जिससे अमेरिका और भी इन दोनों देशों से नाराज है। इसलिए भारत के पास अवसर है कि  वे  इस संकट को अवसर में बदलें।

वेल्स ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि भारत द्वारा यह सप्लाई और चेन में विविधता लाने का एक बहुत ही शानदार प्रयास है। यह भारत के लिए अवसर का एक वास्तविक क्षण है। उन्होंने कहा कि अधिक खुली और स्वागत योग्य नीतियों को अपनाकर और टैरिफ को कम करके भारत के पास विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने का अवसर है।   

कोरोना संकट के दौर में भी भारत के पास सप्लाई-चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने का अवसर है लेकिन उसे टैरिफ कम करना होगा और विदेशी कंपनियों के लिए अधिक स्वागत योग्य नीतियों को अपनाना होगा। ताकि विदेशी कंपनी को भारत में अधिक अवसर मिल सके। यह कहना है अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक का।

राज्य विभाग के दक्षिण और मध्य एशिया ब्यूरो के निवर्तमान प्रमुख एलिस वेल्स ने कहा कि दोनो देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2019 में कुल रिकॉर्ड 150 बिलियन डॉलर था। लेकिन अमेरिका को भारत के लिए संरक्षित बाजार के बारे में चिंताएं हैं जो कभी भी विदेशी कंपनियों को उपयुक्त अवसर नहीं देता है।

वेल्स ने आगे कहा कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा से पहले एक सीमित व्यापार सौदे को अंतिम रूप देने के लिए ठोस प्रयास किए थे, लेकिन कई मुद्दों पर आम सहमति नहीं बन पाई। इस यात्रा से पहले ट्रंप ने 2020 के अंत तक व्यापार समझौते के लिए आशा व्यक्त की थी।

पत्रकारों के लिए एक ऑनलाइन ब्रीफिंग के दौरान, वेल्स ने कहा कि वह इस बात की भविष्यवाणी नहीं कर सकती हैं कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और भारत सरकार इस साल तक समझौते को अंतिम रूप दे ही पाएंगे। लेकिन कोई भी व्यापार सौदा हासिल करने के लिए प्रोत्साहन बहुत अधिक जरूरी है।  

वेल्स ने आगे कहा कि हाल के हफ्तों में, भारत ने वाणिज्यिक बिक्री और अनुदान के माध्यम से अमेरिका सहित दर्जनों देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य दवाओं की आपूर्ति की है। भारत ने मालदीव और कुवैत सहित कई देशों में मेडिकल रैपिड रिस्पांस टीम भेजी है और यह भारत द्वारा अन्य देशों के बीच भरोसा जीतने का अहम कदम है।

वेल्स चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की बहुत आलोचना करते आ रही हैं। उन्होंने कहा चीन और पाकिस्तान सीपीईसी परियोजनाओं में पारदर्शिता नहीं बरत रहा है, जिससे अमेरिका और भी इन दोनों देशों से नाराज है। इसलिए भारत के पास अवसर है कि  वे  इस संकट को अवसर में बदलें।

वेल्स ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि भारत द्वारा यह सप्लाई और चेन में विविधता लाने का एक बहुत ही शानदार प्रयास है। यह भारत के लिए अवसर का एक वास्तविक क्षण है। उन्होंने कहा कि अधिक खुली और स्वागत योग्य नीतियों को अपनाकर और टैरिफ को कम करके भारत के पास विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने का अवसर है।   




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