पंकज शुक्ल, मुंबई, Updated Sat, 23 May 2020 10:41 AM IST
हिंदी सिनेमा में वैजयंती माला से लेकर वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, श्रीदेवी तक दक्षिण भारतीय राज्यों से आने वाली अभिनेत्रियों की समृद्ध परंपरा रही है। इसी परंपरा में अब आपका नाम जुड़ रहा है, क्या सपने रहे आपके हिंदी सिनेमा को लेकर?
मेरा तो यह सपना ना जाने कबसे था। मैं यह कहना चाहूंगी कि मैं शुरुआत से ही एक हिंदी फिल्म करने का सपना देखती थी। मैं चाहती थी कि ज्यादा नहीं तो कम से कम एक हिंदी फिल्म तो मैं जरूर करूं। तब मैं सोचती थी कि अगर मैं एक फिल्म भी करती हूं तो मैं खुश रहूंगी और मुझे तसल्ली होगी कि मैंने कम से कम एक हिंदी फिल्म तो की है। मैं सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान और काजोल, करीना कपूर, करिश्मा, इन सब को देख कर बड़ी हुई हूं। लेकिन, हिंदी के लिए समय निकालना तब मुश्किल था क्योंकि मेरे पास वहां की फिल्में इतनी सारी थीं। धीरे धीरे मैंने अपना समय प्रबंधन ठीक किया। अब भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं कि मेरे सपने सच हो रहे हैं।
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